उज्जैन में DAVS कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन: CM निवास मार्च पर रोक, सड़क पर बैठकर किया विरोध

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उज्जैन में सोमवार को डॉ. आंबेडकर विद्यार्थी संगठन (DAVS) के बैनर तले छात्रों और कार्यकर्ताओं ने विभिन्न छात्रहित मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। संगठन के आह्वान पर बड़ी संख्या में कार्यकर्ता तरणताल चौराहे पर एकत्रित हुए और मुख्यमंत्री निवास की ओर मार्च निकालने का प्रयास किया। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी कर अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने की बात कही।

संगठन का आरोप है कि प्रशासन द्वारा पूर्व में दी गई चेतावनियों और दबाव के कारण अपेक्षित संख्या में छात्र प्रदर्शन में शामिल नहीं हो सके। संगठन के मुताबिक जहां 250 से 300 छात्रों के पहुंचने की संभावना थी, वहीं करीब 60 से 70 कार्यकर्ता ही प्रदर्शन में शामिल हुए। इसके बावजूद कार्यकर्ताओं ने आंदोलन जारी रखते हुए मुख्यमंत्री निवास की ओर बढ़ने का प्रयास किया।

प्रदर्शनकारी जैसे ही आगे बढ़े, पुलिस ने बैरिकेड्स लगाकर उन्हें रोक दिया। इस दौरान कुछ कार्यकर्ताओं ने बैरिकेड्स हटाने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी बहस और नोकझोंक की स्थिति बन गई। विरोध स्वरूप कार्यकर्ता सड़क पर बैठ गए और नारेबाजी शुरू कर दी। हालात को देखते हुए माधवनगर, नीलगंगा और नानाखेड़ा थाना पुलिस सहित अतिरिक्त बल को मौके पर तैनात किया गया, ताकि स्थिति नियंत्रण में बनी रहे।

प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने संगठन के कार्यकर्ता संदीप, राहुल और अमित को हिरासत में ले लिया। साथियों की हिरासत के विरोध में कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन और तेज कर दिया तथा प्रशासन के खिलाफ नारे लगाए। कुछ समय तक चले गतिरोध के बाद प्रशासन ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन लेने पर सहमति जताई, जिसके बाद मामला शांत हुआ और प्रदर्शन समाप्त कर दिया गया।

इसके बाद सभी कार्यकर्ता कलेक्ट्रेट पहुंचे और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में प्रदेशभर के छात्रों से जुड़ी समस्याओं और मांगों को प्रमुखता से उठाया गया। ज्ञापन सौंपने के बाद हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं को रिहा कर दिया गया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूरे घटनाक्रम की समीक्षा की जा रही है और आवश्यकतानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

संगठन के अध्यक्ष राम सोलंकी ने बताया कि आंदोलन का मुख्य उद्देश्य छात्रों की समस्याओं को सरकार तक पहुंचाना था। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं के केंद्र कई बार छात्रों के गृह जिलों से 500 से 800 किलोमीटर दूर आवंटित किए जाते हैं, जिससे विद्यार्थियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है और उन्हें शारीरिक व मानसिक परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है। संगठन ने मांग की है कि परीक्षा केंद्र छात्रों के नजदीकी जिलों में निर्धारित किए जाएं, ताकि उन्हें अनावश्यक कठिनाइयों से राहत मिल सके।