ED की बड़ी कार्रवाई: अफ्रीकी खदानों में 1035 करोड़ के निवेश का हिसाब नहीं, कंपनी के एमडी की 17 हजार रुपये मासिक सैलरी ने बढ़ाए सवाल

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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (फेमा), 1999 के तहत बेंगलुरु और मुंबई में नौ स्थानों पर छापेमारी कर एक बड़े वित्तीय मामले से जुड़े कई अहम दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जब्त किए हैं। यह कार्रवाई राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड और उससे जुड़े व्यक्तियों के खिलाफ चल रही जांच का हिस्सा है।

जांच के दौरान सबसे बड़ा खुलासा अफ्रीकी देशों की खदानों में किए गए 1035 करोड़ रुपये के निवेश को लेकर हुआ। ईडी को इस निवेश से संबंधित आवश्यक रिकॉर्ड और दस्तावेज नहीं मिले, जबकि कंपनी भी अब तक उन्हें उपलब्ध कराने में असफल रही है।

अधिकारियों के अनुसार विदेशी आयात, निर्यात, निवेश और अन्य अंतरराष्ट्रीय लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों का अभाव जांच में बड़ी बाधा बन रहा है। रिकॉर्ड नहीं होने के कारण इन ट्रांजेक्शनों की वास्तविकता और वैधता की पुष्टि करना मुश्किल हो गया है।

जांच में करीब 3000 करोड़ रुपये के विदेशी व्यापार से जुड़े भुगतान और वसूली के बीच संदिग्ध नेटिंग या सेट-ऑफ की प्रक्रिया भी सामने आई है। ईडी को आशंका है कि यूएई सहित अन्य देशों की संदिग्ध संस्थाओं के साथ वित्तीय लेन-देन को समायोजित कर वास्तविक जानकारी छिपाने की कोशिश की गई।

तलाशी के दौरान फैक्ट्री में स्टॉक का भौतिक सत्यापन भी किया गया। इसमें कंपनी के रिकॉर्ड में दर्ज माल और मौके पर मौजूद वास्तविक स्टॉक के बीच लगभग 40 प्रतिशत का अंतर पाया गया, जिससे इन्वेंट्री प्रबंधन और वित्तीय रिपोर्टिंग पर सवाल खड़े हो गए हैं।

जांच एजेंसी को कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों के वेतन ढांचे में भी असामान्य स्थिति दिखाई दी। जानकारी के अनुसार मुख्य वित्तीय अधिकारी को वर्ष 2020 से कोई वेतन नहीं मिला, जबकि कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर को केवल 17 हजार रुपये प्रति माह का पारिश्रमिक दिया जा रहा था।

ईडी के मुताबिक कंपनी ने अपने वित्तीय दस्तावेजों में लाखों करोड़ रुपये के समेकित राजस्व का उल्लेख किया है, लेकिन शीर्ष प्रबंधन का बेहद कम वेतन कारोबारी गतिविधियों के सामान्य मानकों से मेल नहीं खाता। इसी वजह से इस पहलू की भी विस्तार से जांच की जा रही है।

इसके अलावा कंपनी के शेयरों में संदिग्ध ब्लॉक ट्रेड और संभावित हेरफेर के संकेत भी मिले हैं। जांच में ऐसे व्यक्तियों के नाम सामने आए हैं जिनका उल्लेख अंतरराष्ट्रीय लीक दस्तावेजों में भी किया गया था। ईडी को संदेह है कि एनआरआई बेनामी खातों के जरिए 600 करोड़ रुपये से अधिक की राशि विदेश भेजी गई, जिसकी जांच जारी है।