कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने गाजा में जारी संघर्ष और वहां बच्चों पर पड़ रहे गंभीर मानवीय संकट को लेकर केंद्र सरकार की विदेश नीति पर तीखा सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामने आ रही रिपोर्टों में गाजा के हालात बेहद चिंताजनक बताए गए हैं, लेकिन भारत सरकार ने इस मुद्दे पर अब तक कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दी है।
अपने लेख में सोनिया गांधी ने संयुक्त राष्ट्र की स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच आयोग की हालिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि रिपोर्ट में गाजा में बच्चों और आम नागरिकों पर हुए हमलों को लेकर गंभीर टिप्पणियां की गई हैं। उनका कहना है कि रिपोर्ट के अनुसार वहां बच्चों की सुरक्षा और उनके जीवन पर सबसे अधिक खतरा मंडरा रहा है।
सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि गाजा में हजारों बच्चों की मौत और बड़ी संख्या में उनके घायल होने की घटनाएं केवल युद्ध का परिणाम नहीं बल्कि एक गहरे मानवीय संकट की तस्वीर पेश करती हैं। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में बच्चे स्थायी रूप से दिव्यांग हुए हैं और लाखों परिवार आज भी भय और असुरक्षा के माहौल में जीवन बिताने को मजबूर हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था पर संघर्ष का सबसे अधिक असर पड़ा है। बड़ी संख्या में स्कूल और अस्पताल क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, जिसके कारण बच्चों की पढ़ाई, इलाज और सामान्य जीवन पूरी तरह प्रभावित हुआ है। गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की स्थिति भी लगातार गंभीर होती जा रही है।
सोनिया गांधी ने स्पष्ट किया कि हमास द्वारा इजराइल पर किया गया हमला निंदनीय और अस्वीकार्य था, लेकिन उसके बाद की सैन्य कार्रवाई भी अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों के अनुरूप नहीं दिखाई देती। उनका कहना है कि किसी भी संघर्ष में निर्दोष नागरिकों, विशेषकर बच्चों को निशाना बनाना स्वीकार्य नहीं हो सकता।
उन्होंने बताया कि संयुक्त राष्ट्र जांच आयोग की अगुआई भारत के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस एस. मुरलीधर कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में तैयार रिपोर्ट में गाजा की स्थिति का विस्तृत विश्लेषण किया गया है और कई गंभीर निष्कर्ष सामने रखे गए हैं। सोनिया गांधी ने कहा कि इतनी महत्वपूर्ण रिपोर्ट आने के बावजूद भारत सरकार की ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के कई देश इजराइल की सैन्य कार्रवाई पर लगातार चिंता जता रहे हैं, जबकि भारत ने अपेक्षाकृत शांत रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि पहले भारत वैश्विक मंचों पर मानवाधिकार, शांति और विकासशील देशों की आवाज को मजबूती से उठाता था, लेकिन वर्तमान समय में उसकी भूमिका बदलती हुई दिखाई दे रही है।
सोनिया गांधी ने अपने लेख में जस्टिस एस. मुरलीधर के दिल्ली हाईकोर्ट से हुए तबादले का भी उल्लेख किया और कहा कि उनके नेतृत्व वाली रिपोर्ट को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उनका मानना है कि इस रिपोर्ट में उठाए गए मुद्दों पर भारत सरकार को अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए।
उन्होंने अमेरिका की भूमिका का जिक्र करते हुए कहा कि इजराइल को मिल रहे समर्थन के कारण संयुक्त राष्ट्र स्तर पर कई ठोस कदम नहीं उठाए जा सके। हालांकि संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न एजेंसियों ने गाजा में हुए घटनाक्रम का विस्तृत दस्तावेजीकरण किया है और कई देशों ने भी अपनी चिंताएं सार्वजनिक रूप से व्यक्त की हैं।
सोनिया गांधी के अनुसार फ्रांस, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों ने फिलिस्तीन के मुद्दे पर अपने रुख में बदलाव दिखाया है। वहीं कुछ यूरोपीय देशों ने इजराइल को हथियारों की आपूर्ति पर प्रतिबंध या नियंत्रण लगाने जैसे कदम भी उठाए हैं। कई देशों ने अपने कूटनीतिक संबंधों की भी समीक्षा की है।
उन्होंने कहा कि दक्षिण अफ्रीका द्वारा अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) में दायर मामला भी इस बात का संकेत है कि वैश्विक स्तर पर गाजा के हालात को लेकर गंभीर चिंताएं बढ़ रही हैं। उनके अनुसार अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार इस संघर्ष के मानवीय पहलुओं पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि भारत की वर्तमान नीति का लाभ पाकिस्तान उठाने की कोशिश कर रहा है। उनका कहना है कि भारत अपने पुराने कूटनीतिक संबंधों और वैश्विक प्रतिष्ठा के आधार पर अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकता था, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में वह अवसर कमजोर पड़ता दिखाई दे रहा है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के संबंधों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की विदेश नीति केवल व्यक्तिगत समीकरणों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसे राष्ट्रीय हितों और मानवीय मूल्यों के संतुलन के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
सोनिया गांधी ने कहा कि भारत की ऐतिहासिक पहचान हमेशा शांति, न्याय, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और मानवाधिकारों के समर्थन की रही है। इसलिए गाजा में आम नागरिकों, विशेषकर बच्चों के साथ हो रही त्रासदी पर भारत को स्पष्ट और संतुलित रुख अपनाना चाहिए।
उन्होंने अंत में कहा कि भारतीय जनता को गाजा में हो रही घटनाओं की पूरी जानकारी मिलनी चाहिए और देश को अपने नैतिक दायित्वों के अनुरूप मानवता, अंतरराष्ट्रीय कानून तथा निर्दोष नागरिकों की सुरक्षा के पक्ष में खुलकर आवाज उठानी चाहिए।