प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को सभी केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों के सचिवों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक करेंगे। बैठक का मुख्य उद्देश्य केंद्र सरकार द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में लागू किए गए सुधारों की प्रगति की समीक्षा करना और भविष्य की कार्ययोजना पर चर्चा करना है। माना जा रहा है कि इसमें ‘ईज ऑफ लिविंग’ और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ से जुड़े सुधारों की विस्तृत समीक्षा की जाएगी। विभिन्न मंत्रालयों के सचिव अपने-अपने विभागों की उपलब्धियों, चल रही योजनाओं और आम जनता के हित में किए गए सुधारों की प्रस्तुति देंगे। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का है और यह बैठक उसी दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।
इसी बीच भारत सरकार ने ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए दो सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल भेजने का फैसला किया है। इस प्रतिनिधिमंडल में बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा शामिल होंगे। खामनेई का निधन इस वर्ष फरवरी में हुआ था और उनके अंतिम संस्कार की रस्में 4 जुलाई से शुरू होंगी। भारत की ओर से इस प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी दोनों देशों के कूटनीतिक संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल की खुदरा बिक्री पर लागू अस्थायी प्रतिबंध भी समाप्त करने का निर्णय लिया है। एक जुलाई से देशभर के पेट्रोल पंपों पर प्रति ग्राहक और प्रति वाहन प्रतिदिन 200 लीटर ईंधन की सीमा खत्म कर दी जाएगी। यह सीमा जून में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईंधन की संभावित कमी को देखते हुए लागू की गई थी ताकि कालाबाजारी, जमाखोरी और ईंधन की हेराफेरी पर रोक लगाई जा सके। सरकार का कहना है कि हालात सामान्य होने के बाद अब यह प्रतिबंध हटाने का फैसला लिया गया है।
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने पाकिस्तान के साथ कथित ट्रैक-2 कूटनीतिक वार्ता की खबरों को भी पूरी तरह खारिज किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विदेशों में सेवानिवृत्त अधिकारियों, पूर्व राजनयिकों या अन्य व्यक्तियों के बीच होने वाली निजी बैठकों से भारत सरकार का कोई संबंध नहीं है और ऐसी बैठकों को आधिकारिक संवाद नहीं माना जा सकता। हाल ही में श्रीलंका के कोलंबो में भारत और पाकिस्तान के पूर्व अधिकारियों के बीच हुई कथित बातचीत को लेकर उठे सवालों के जवाब में उन्होंने यह स्पष्टीकरण दिया।
रक्षा क्षेत्र में भारतीय सेना ने अपनी युद्ध क्षमता बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सेना विशेष ‘बाज बटालियन’ का गठन कर रही है, जिनका मुख्य कार्य अत्याधुनिक रिमोट-चालित विमानों (ड्रोन) का संचालन और निगरानी करना होगा। ये इकाइयां आर्मी एविएशन कोर के तहत कार्य करेंगी और युद्धक्षेत्र में खुफिया जानकारी जुटाने, निगरानी करने तथा त्वरित कार्रवाई की क्षमता को और मजबूत करेंगी। सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी के अनुसार, पिछले दो वर्षों में सेना के पास मौजूद ड्रोन की संख्या कई गुना बढ़कर 50 हजार से अधिक हो चुकी है और अगले कुछ वर्षों में इसे दोगुना करने की योजना है।
इसके अलावा केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों में चल रहे सुधारों, प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने और आम नागरिकों तक योजनाओं का लाभ तेजी से पहुंचाने पर भी बैठक में विस्तार से चर्चा होने की संभावना है। बैठक के बाद सरकार की आगामी प्राथमिकताओं और सुधार एजेंडे को लेकर महत्वपूर्ण फैसले सामने आ सकते हैं।