राजस्थान की पारंपरिक शाही रसोई से जुड़ी एक अनोखी डिश इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। बीकानेर की शेफ चारू सोनी ने ऐसी “चांदी की चटनी” तैयार की है, जिसे देखकर अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी भी आश्चर्यचकित रह गईं। यह चटनी सामान्य चटनी की तरह नहीं होती, बल्कि इसमें चांदी भस्म, स्वर्ण भस्म और कई प्रकार के सूखे मेवों का उपयोग किया जाता है। बताया जाता है कि यह व्यंजन कभी राजघरानों और राजा-महाराजाओं की विशेष थालियों का हिस्सा हुआ करता था।
चारू सोनी ने इस खास चटनी को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान तब दिलाई, जब उन्होंने इसे ‘मास्टर शेफ इंडिया’ के मंच पर प्रस्तुत किया। शो में मौजूद शिल्पा शेट्टी ने जब इस चटनी के बारे में सुना और उसकी सामग्री जानी, तो उन्होंने हैरानी जताते हुए पूछा कि क्या सचमुच चांदी से बनी चटनी भी तैयार की जाती है। चारू के अनुसार यह केवल स्वाद का प्रयोग नहीं, बल्कि राजस्थानी शाही भोजन परंपरा का एक दुर्लभ हिस्सा है।
इस चटनी को तैयार करने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री काफी महंगी मानी जाती है। चारू बताती हैं कि इसमें चांदी भस्म, स्वर्ण भस्म, बादाम, किशमिश और अन्य सूखे मेवे मिलाए जाते हैं। इसे परंपरागत रूप से चांदी के बर्तन में ही रखा और परोसा जाता है। बाजार में इसका कोई तय मूल्य नहीं है, लेकिन इसे बनाने में लगभग 60 से 70 हजार रुपए प्रति किलो तक का खर्च आ सकता है। यही वजह है कि यह व्यंजन आमतौर पर बेहद सीमित और विशेष अवसरों के लिए ही तैयार किया जाता है।
चारू सोनी का कहना है कि उन्हें इस चटनी का विचार एक वैद्य से मिला था। वैद्य ने उन्हें बताया था कि पुराने समय में राजघरानों में इस प्रकार की चटनी बनाई जाती थी और इसे स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता था। उसी बातचीत के बाद उन्होंने इस पारंपरिक विचार को आधुनिक प्रस्तुति के साथ दोबारा जीवित करने का प्रयास किया। उन्होंने पहले घर पर प्रयोग किए और बाद में इसे शाही प्लेटिंग के साथ पेश करना शुरू किया।
बीकानेर के रांगड़ी चौक क्षेत्र से आने वाली चारू सोनी का सफर भी कम दिलचस्प नहीं है। शादी के समय उन्हें खाना बनाना तक नहीं आता था। उन्होंने खुद बताया कि ससुराल आने के बाद उन्हें आटा गूंथना भी नहीं आता था। उनके पति ललित सोनी ने उन्हें रसोई के काम सिखाए। धीरे-धीरे उन्होंने राजस्थानी व्यंजनों की बारीकियां सीखीं और नए स्वादों पर काम करना शुरू किया। आज वही चारू शाही व्यंजनों के लिए जानी जाती हैं।
चारू की रुचि धीरे-धीरे प्रयोगात्मक और पारंपरिक भोजन को नए अंदाज में पेश करने की ओर बढ़ी। बीकानेर में होने वाली टिफिन गोठ जैसी गतिविधियों में वे अलग-अलग डिश बनाकर भेजती थीं, जिन्हें लोगों ने काफी पसंद किया। लगातार मिल रही सराहना ने उन्हें आगे बढ़ने का आत्मविश्वास दिया। बाद में उन्होंने कुकिंग प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया और सफलता भी हासिल की, जिससे उनके लिए नए अवसर खुलते गए।
‘मास्टर शेफ इंडिया’ में चारू ने अपने बेटे हेमांग के साथ भाग लिया। इस मंच पर उन्होंने राजस्थान की रॉयल फूड परंपरा को आधुनिक प्रस्तुति के साथ दिखाया। उन्होंने मोठ की रोटी, शाही राजस्थानी व्यंजन और पारंपरिक स्वादों को नई प्लेटिंग और नए रूप में पेश किया। उनका उद्देश्य केवल खाना बनाना नहीं, बल्कि राजस्थान की पुरानी खाद्य विरासत को नए दर्शकों तक पहुंचाना था।
चारू वर्तमान में जयपुर के सिटी पैलेस में पिछले कई वर्षों से शेफ के रूप में कार्य कर रही हैं। वहां आने वाले देशी और विदेशी मेहमानों को वे मुख्य रूप से पारंपरिक राजस्थानी भोजन परोसती हैं। उनके अनुसार विदेशी मेहमान विशेष रूप से उन व्यंजनों में रुचि दिखाते हैं, जिनका संबंध राजस्थानी इतिहास और शाही खानपान से होता है। चांदी की चटनी भी उन्हीं विशेष प्रस्तुतियों में शामिल की जाती है।
चारू ने यह भी बताया कि उनके हाथ के बने व्यंजनों को कई प्रसिद्ध हस्तियों ने पसंद किया है। उन्होंने अभिनेत्री करिश्मा कपूर के लिए विशेष मिठाई और राजस्थानी भोजन तैयार किया था, जिसे करिश्मा ने पुराने पारिवारिक स्वादों की याद दिलाने वाला बताया। इसी तरह अभिनेता चंकी पांडे ने भी उनके व्यंजनों की सराहना की। हालांकि चारू का कहना है कि उनके लिए सबसे बड़ी उपलब्धि किसी सेलिब्रिटी की तारीफ नहीं, बल्कि बीकानेर की पारंपरिक रसोई को राष्ट्रीय पहचान मिलना है।
अपनी सफलता का श्रेय चारू जयपुर सिटी पैलेस से मिले अवसर को देती हैं। उनका मानना है कि राजस्थानी भोजन केवल स्वाद नहीं, बल्कि संस्कृति, परंपरा और इतिहास का हिस्सा है। चांदी की चटनी के माध्यम से उन्होंने उसी भूली-बिसरी शाही परंपरा को फिर से लोगों के सामने लाने की कोशिश की है। बीकानेर की रसोई से शुरू हुआ यह सफर आज राष्ट्रीय मंच तक पहुंच चुका है और राजस्थानी शाही व्यंजनों को एक नई पहचान दिला रहा है।

