पंजाब के अमृतसर जिले में मस्जिद जाने को लेकर एक सिख युवक और निहंग के बीच विवाद सामने आया है। यह मामला उस समय चर्चा में आया जब निहंग भूपिंदर सिंह बग्गा ने एक सिख युवक को मस्जिद की ओर जाते हुए रोक लिया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए जाने के बाद पूरे इलाके में इस विषय को लेकर चर्चा तेज हो गई। विवाद का केंद्र धार्मिक आस्था, सामाजिक व्यवहार और गांव के माहौल को लेकर उठे सवाल हैं।
जानकारी के अनुसार, संबंधित युवक गांव की मस्जिद में एक मौलवी से मिलने गया था। निहंग ने उसे रास्ते में रोककर पूछताछ की और कहा कि सिखों को मस्जिदों में जाने के बजाय गुरुघरों में जाना चाहिए। वीडियो में निहंग युवक से यह भी पूछता दिखाई देता है कि वह मस्जिद किस उद्देश्य से गया था और वहां से क्या लेकर आया है। युवक ने जवाब में कहा कि वह किसी धार्मिक कारण से नहीं, बल्कि अपनी भैंस की बीमारी के संबंध में सलाह लेने गया था।
युवक ने स्पष्ट किया कि उसकी भैंस के गर्भाशय में समस्या थी और उसी के बारे में पूछने के लिए वह मौलवी के पास गया था। उसने यह भी कहा कि उसने न तो वहां माथा टेका, न कोई ताबीज लिया और न ही कोई धार्मिक वस्तु अपने साथ लेकर आया। युवक ने दावा किया कि यदि उसने कोई पैसा दिया हो या कोई वस्तु ली हो तो वह उसकी जिम्मेदारी लेने को तैयार है। इस बयान के बाद भी निहंग ने उससे और सवाल पूछे।
वीडियो में आगे निहंग ने युवक से मौलवी को फोन मिलाने के लिए कहा। फोन पर हुई बातचीत में निहंग ने मौलवी से पूछा कि युवक उसके पास आया था या नहीं और उसे क्या दिया गया। मौलवी ने कथित तौर पर कहा कि युवक उसके पास से कुछ लेकर नहीं गया। इसके बाद निहंग ने दोनों के बयानों में अंतर बताते हुए आपत्ति जताई और पूरे मामले को गंभीर बताया।
निहंग भूपिंदर सिंह बग्गा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर वीडियो साझा करते हुए कहा कि उन्होंने पहले इस मामले को सार्वजनिक नहीं किया था। उनका कहना है कि युवक को पहले भी मस्जिद जाने से रोका गया था, लेकिन बाद में वह दोबारा वहां गया, जिसके बाद उन्होंने वीडियो जारी करने का फैसला किया। उन्होंने दावा किया कि गांव में कुछ लोग चोरी-छिपे मस्जिद में जाते हैं और इस विषय पर खुलकर बात नहीं करते।

भूपिंदर सिंह ने मस्जिद में रहने वाले मौलवी पर जादू-टोना करने जैसे आरोप भी लगाए। उन्होंने कहा कि इस संबंध में वह पहले भी गांव के लोगों, पंचायत और धार्मिक प्रतिनिधियों को जानकारी दे चुके हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ ग्रामीण और अमृतधारी सिख भी वहां जाते हैं, लेकिन वे सार्वजनिक रूप से इस पर बोलने से बचते हैं।
विवाद के दौरान निहंग ने यह भी दावा किया कि आसपास के कई गांवों के मृतकों को मस्जिद के पास दफनाया जाता है। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में बाहरी गांवों से शव लाए गए तो वह इसका विरोध करेंगे। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित युवक मस्जिद से कोई धागा या ताबीज लेकर निकला था, जबकि युवक ने इस आरोप से इनकार किया। इस मुद्दे को लेकर गांव में अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
निहंग ने गांव की पंचायत, ग्रंथी सिंहों और किसान संगठनों से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि गांव का माहौल प्रभावित हो रहा है और इस विषय पर सामूहिक चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ महिलाएं दूध या अन्य कामों के बहाने वहां जाती हैं। हालांकि, इन दावों के समर्थन में कोई आधिकारिक प्रमाण सामने नहीं आया है।
वीडियो में निहंग ने मौलवी को गांव छोड़ने के लिए एक सप्ताह का समय देने की बात कही। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो गांव के पुल पर धरना दिया जाएगा। साथ ही उन्होंने ग्रामीणों से किसी भी संभावित विवाद की स्थिति में एकजुट रहने की अपील की। यह बयान सामने आने के बाद मामले की संवेदनशीलता और बढ़ गई है।
फिलहाल इस पूरे विवाद को लेकर प्रशासन की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद लोग इसे धार्मिक स्वतंत्रता, सामाजिक दबाव और गांव स्तर के विवाद के रूप में देख रहे हैं। मामला अभी आरोपों और बयानों के स्तर पर है, इसलिए सभी पक्षों की बात और प्रशासनिक जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

