हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की जनसभा के बाद रामलीला मैदान में मंच के शुद्धिकरण का मामला अब संसद तक पहुंच गया है। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस मुद्दे को उठाते हुए आरोप लगाया कि उनके भाषण के बाद मंच पर हवन कर उसका शुद्धिकरण कराया गया। उन्होंने इस घटना को अपने अपमान और छुआछूत की मानसिकता से जोड़ते हुए कड़ी आपत्ति जताई।
खड़गे ने राज्यसभा में कहा कि उन्होंने हल्द्वानी के रामलीला मैदान में आयोजित सभा को संबोधित किया था। उनके मुताबिक, भाषण के दौरान उन्होंने किसी समाज या धर्म के खिलाफ कोई टिप्पणी नहीं की, बल्कि केवल जनता से जुड़ी समस्याओं को सामने रखा। खड़गे ने कहा कि इसके बावजूद उनके भाषण के बाद मंच का शुद्धिकरण कराया गया, जिसे उन्होंने बेहद अपमानजनक बताया।
मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि वह अनुसूचित जाति से आते हैं और लंबे समय से सार्वजनिक जीवन में हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी किसी के सामने अपने सम्मान के लिए गिड़गिड़ाने का रास्ता नहीं अपनाया और अन्याय के खिलाफ लड़ने की शक्ति रखते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मंच का शुद्धिकरण कर उनके साथ छुआछूत जैसा व्यवहार किया गया।
खड़गे ने मांग की कि हल्द्वानी में मंच का शुद्धिकरण कराने वाले लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाए। उन्होंने इसे केवल व्यक्तिगत अपमान का मामला नहीं बताया, बल्कि सामाजिक भेदभाव से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया। उनका कहना है कि ऐसी घटनाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि किसी भी व्यक्ति के साथ जाति के आधार पर भेदभाव न हो।
मामला संसद में उठने के बाद सदन के नेता और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने भी इस पर सरकार और पार्टी का पक्ष रखा। नड्डा ने कहा कि खड़गे के साथ जो हुआ या जिस वजह से उनकी भावनाएं आहत हुईं, वह केवल किसी एक राजनीतिक दल के लिए नहीं बल्कि पूरे देश के लिए दुखद है। उन्होंने साफ कहा कि ऐसी किसी भी गतिविधि का समर्थन नहीं किया जाता।
जेपी नड्डा ने कहा कि पूरे मामले की गहराई से जांच कराई जाएगी। अगर जांच में कोई व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, उन्होंने खड़गे से इस मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं करने की अपील भी की। नड्डा के बयान के बाद मामले को लेकर संसद में सरकार की ओर से जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया गया।
हंगामे के बीच कार्यवाहक सभापति सी. पी. राधाकृष्णन ने भी इस मामले पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि दलगत राजनीति और विचारधारा से ऊपर उठकर सभी को छुआछूत की कड़ी निंदा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि छुआछूत से बड़ा कोई पाप नहीं है और समाज में किसी भी व्यक्ति के साथ इस तरह का भेदभाव स्वीकार नहीं किया जा सकता।
सभापति ने कहा कि सभी लोग पहले से ही शुद्ध हैं और किसी व्यक्ति को बार-बार शुद्ध करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि जिस किसी ने भी ऐसा गलत काम किया है, उसकी जांच होनी चाहिए। दोषी पाए जाने वाले लोगों को पकड़ा जाना चाहिए और उनके खिलाफ कानून के अनुसार सजा होनी चाहिए। इस बयान के बाद सदन में मामले को लेकर कार्रवाई की मांग और तेज हो गई।
यह पूरा विवाद 8 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में हुई मल्लिकार्जुन खड़गे की ‘विजय शंखनाद रैली’ के बाद शुरू हुआ। इसके अगले दिन 9 अगस्त को मैदान में कुछ हिंदू संगठनों की ओर से पूजा-पाठ और हवन कराया गया। कांग्रेस ने इस शुद्धिकरण को खड़गे की जाति से जोड़ते हुए इसे जातिगत भेदभाव और दलित विरोधी मानसिकता का उदाहरण बताया।
वहीं, हिंदू संगठनों का कहना है कि हवन खड़गे की जाति की वजह से नहीं कराया गया था। उनका दावा है कि रैली के दौरान कथित तौर पर इस्लामिक नारे लगाए गए थे और सनातन धर्म के अपमान के विरोध में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हवन किया गया। दूसरी ओर, भाजपा ने भी कहा है कि रामलीला मैदान में कराया गया हवन पार्टी का आधिकारिक कार्यक्रम नहीं था।
अब इस मामले में संसद में जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग उठ चुकी है। एक तरफ खड़गे इसे अपने सम्मान और सामाजिक भेदभाव से जुड़ा मामला बता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ संबंधित संगठनों की ओर से शुद्धिकरण के पीछे अलग कारण बताए जा रहे हैं। सरकार की ओर से मामले की जांच कराने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है।

