रांची स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) कार्यालय पर हुए पेट्रोल बम हमले की जांच में पुलिस को कई अहम सुराग मिले हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि इस हमले की साजिश स्थानीय स्तर पर नहीं, बल्कि विदेश में बैठे कुछ लोगों के निर्देश पर तैयार की गई थी। जांच एजेंसियां अब इस पूरे मामले को केवल एक आपराधिक घटना नहीं बल्कि संगठित नेटवर्क से जुड़ी गतिविधि के रूप में भी देख रही हैं। पुलिस लगातार गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है और डिजिटल साक्ष्यों को खंगाल रही है।
पुलिस के अनुसार, मामले में गिरफ्तार मुख्य आरोपी अमन अंसारी को आरएसएस कार्यालय को निशाना बनाने का टास्क दिया गया था। पूछताछ के दौरान यह जानकारी सामने आई कि हमले की योजना पहले से तैयार की गई थी और इसके लिए आरोपियों के बीच लगातार संपर्क बना हुआ था। जांचकर्ताओं का मानना है कि हमले का उद्देश्य केवल नुकसान पहुंचाना नहीं था, बल्कि इसका वीडियो बनाकर उसे विदेश में बैठे लोगों तक पहुंचाना भी योजना का हिस्सा था।

इस मामले में गिरफ्तार सैफ अंसारी और अयान खान की भूमिका भी जांच के दायरे में है। सैफ अंसारी पूछताछ के दौरान पुलिस हिरासत से फरार हो गया था, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हुए। हालांकि पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उसे मांडर इलाके से दोबारा गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के दौरान हुई कार्रवाई में उसके पैर में गोली लगने की बात सामने आई, जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस घटनाक्रम के बाद पुलिस ने पूरे मामले की सुरक्षा और जांच व्यवस्था को और सख्त कर दिया है।
जांच के दौरान दुबई में रहने वाले शाहबाज आलम उर्फ भट्टी का नाम प्रमुखता से सामने आया है। पुलिस का दावा है कि वह विदेश में रहकर भारत में मौजूद कुछ लोगों के संपर्क में था और कथित तौर पर उन्हें निर्देश देता था। अधिकारियों के अनुसार, हमले के बाद घटनास्थल का वीडियो रिकॉर्ड कर विदेश भेजा गया था। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क के जरिए और कौन-कौन लोग जुड़े हुए थे तथा उनकी भूमिकाएं क्या थीं।
अमन अंसारी के विदेश में काम करने और वहां कुछ लोगों के संपर्क में आने की जानकारी भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हुई है। पुलिस उसके बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही है। अधिकारियों को संदेह है कि विदेश से धनराशि भेजी गई हो सकती है, जिसका इस्तेमाल इस तरह की गतिविधियों के लिए किया जाना था। आर्थिक लेनदेन और डिजिटल कम्युनिकेशन के रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं ताकि पूरे नेटवर्क की परतें खोली जा सकें।
घटना के बाद रांची सहित आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत कर दिया गया है। संवेदनशील स्थलों पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है और सीसीटीवी निगरानी बढ़ाई गई है। पुलिस विभिन्न जिलों में छापेमारी और जांच अभियान भी चला रही है ताकि नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों की पहचान की जा सके। केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय बनाकर मामले की जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है।
अधिकारियों का कहना है कि अभी जांच जारी है और आने वाले दिनों में कई और महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं। पुलिस का मुख्य फोकस उन लोगों तक पहुंचना है जो पर्दे के पीछे रहकर इस पूरी साजिश को संचालित कर रहे थे। जांच एजेंसियों का मानना है कि तकनीकी साक्ष्य, वित्तीय रिकॉर्ड और आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर जल्द ही पूरे नेटवर्क की तस्वीर स्पष्ट हो सकती है। इस मामले को लेकर सुरक्षा एजेंसियां लगातार सतर्क हैं और हर पहलू की गहन जांच की जा रही है।