अमरनाथ यात्रा 2026: पहली पूजा के साथ तैयारियां अंतिम चरण में, 3 जुलाई से शुरू होगी 57 दिन की पवित्र यात्रा

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अमरनाथ यात्रा शुरू होने से पहले सोमवार को बाबा बर्फानी की पारंपरिक पहली पूजा संपन्न हुई। इस अवसर पर जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल एवं श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड (SASB) के अध्यक्ष मनोज सिन्हा ने पवित्र गुफा में पूजा-अर्चना कर देशभर के श्रद्धालुओं की सुखद और सुरक्षित यात्रा की कामना की। पहली पूजा के साथ ही यात्रा की आधिकारिक तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं।

इस वर्ष अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त यानी रक्षाबंधन के दिन संपन्न होगी। लगभग 57 दिनों तक चलने वाली इस धार्मिक यात्रा के लिए देशभर से श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। प्रशासन के अनुसार अब तक 4 लाख से अधिक श्रद्धालु अपना पंजीकरण करा चुके हैं, जबकि आने वाले दिनों में यह संख्या और बढ़ने की संभावना है। पहलाआधिकारिक जत्था 2 जुलाई को जम्मू के भगवती नगर बेस कैंप से रवाना होगा।

यात्रा को सुरक्षित और सुचारु बनाने के लिए प्रशासन ने सभी प्रमुख व्यवस्थाओं को लगभग पूरा कर लिया है। दोनों यात्रा मार्गों पर स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया गया है और बालटाल व चंदनवाड़ी में बेस अस्पताल पूरी तरह संचालित कर दिए गए हैं। इसके अलावा पूरे मार्ग पर चिकित्सा सहायता, आपातकालीन सेवाएं और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं ताकि किसी भी स्थिति में श्रद्धालुओं को तत्काल मदद मिल सके।

यात्रा मार्गों पर बुनियादी ढांचे को भी बेहतर बनाया गया है। सड़क, संचार, पेयजल, बिजली और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की समीक्षा लगातार की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार महागणेश टॉप के पास बर्फ हटाने का कार्य अंतिम चरण में है और इसे जल्द पूरा कर लिया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं की आवाजाही पूरी तरह सुगम हो सके।

अमरनाथ यात्रा के लिए श्रद्धालुओं के पास दो मार्ग उपलब्ध रहेंगे। पहला पारंपरिक पहलगाम मार्ग है, जिसकी लंबाई लगभग 41 किलोमीटर है। इस मार्ग से यात्रा अपेक्षाकृत धीरे-धीरे पूरी होती है, जिससे श्रद्धालुओं को ऊंचाई के वातावरण के अनुरूप ढलने का पर्याप्त समय मिलता है। दूसरा मार्ग बालटाल का है, जिसकी लंबाई लगभग 7 किलोमीटर है। यह दूरी कम होने के बावजूद अधिक खड़ी और चुनौतीपूर्ण मानी जाती है, इसलिए इस रास्ते पर यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

यात्रा शुरू होने से पहले सुरक्षा व्यवस्था की तैयारियों का भी व्यापक परीक्षण किया गया। जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर सुरक्षा बलों और प्रशासन की ओर से ट्रायल काफिले का सफल ड्राई रन आयोजित किया गया, जिसमें काफिले की आवाजाही, सुरक्षा प्रबंधन, लॉजिस्टिक्स और विभिन्न एजेंसियों के समन्वय का परीक्षण किया गया। ट्रायल के दौरान सुरक्षा मानकों का बारीकी से आकलन किया गया ताकि वास्तविक यात्रा के समय किसी प्रकार की बाधा न आए।

प्रशासन का कहना है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से यात्रा मार्गों पर सुरक्षा बलों की तैनाती, निगरानी व्यवस्था और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली को और मजबूत किया गया है। सभी तैयारियों को समय पर पूरा करने के लिए संबंधित विभाग लगातार समन्वय के साथ कार्य कर रहे हैं, जिससे 3 जुलाई से शुरू होने वाली अमरनाथ यात्रा शांतिपूर्ण, सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराई जा सके।