उज्जैन स्थित इस्कॉन मंदिर में सोमवार को भगवान जगन्नाथ की वार्षिक रथ यात्रा से पहले पारंपरिक स्नान यात्रा महोत्सव श्रद्धा और उत्साह के साथ आयोजित किया गया। इस अवसर पर भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा का पंचामृत के साथ गंगा, यमुना, नर्मदा, शिप्रा सहित विभिन्न पवित्र नदियों एवं तीर्थों के जल से वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधिवत अभिषेक किया गया। पूरे आयोजन के दौरान मंदिर परिसर भजन-कीर्तन और जयघोष से भक्तिमय बना रहा तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन कर पुण्य लाभ प्राप्त किया।
स्नान यात्रा के तहत सुबह मंदिर परिसर से भगवान की शोभायात्रा निकाली गई, जिसे विशेष रूप से सजाई गई वेदी तक लाया गया। यहां वैदिक परंपरा के अनुसार भगवान का महाभिषेक संपन्न हुआ। अभिषेक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए श्रद्धालुओं के लिए पारंपरिक वेशभूषा का पालन कराया गया, जिससे धार्मिक मर्यादा और उत्सव की गरिमा बनी रही। महिलाओं ने साड़ी तथा पुरुषों ने धोती-कुर्ता पहनकर भगवान की सेवा और पूजा-अर्चना में भाग लिया।
मंदिर प्रशासन के अनुसार श्रद्धालुओं को स्वयं भगवान का पंचामृत एवं पवित्र तीर्थ जल से अभिषेक करने का अवसर भी दिया गया। इस दौरान भक्तों ने पूरी श्रद्धा के साथ भगवान की आराधना की और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेकर आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव किया। कार्यक्रम में सुबह से दोपहर तक लगातार पूजा-अर्चना, मंत्रोच्चार और भजन-कीर्तन का आयोजन चलता रहा।
धार्मिक मान्यता के अनुसार स्नान यात्रा के बाद भगवान जगन्नाथ अस्वस्थ माने जाते हैं। इसी परंपरा का पालन करते हुए अब भगवान अगले 15 दिनों तक अनवसर (विश्राम काल) में रहेंगे। इस अवधि में नियमित दर्शन बंद रहेंगे और भगवान विशेष विश्राम करेंगे। इसके बाद आषाढ़ शुक्ल द्वितीया के शुभ अवसर पर 16 जुलाई को भगवान जगन्नाथ भव्य रथ यात्रा के माध्यम से नगर भ्रमण के लिए निकलेंगे, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।
स्नान महोत्सव के उपरांत भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के गजवेश (हाथी स्वरूप) के विशेष दर्शन भी श्रद्धालुओं के लिए कराए गए। इस अलौकिक स्वरूप के दर्शन के लिए दिनभर भक्तों की भीड़ मंदिर परिसर में उमड़ती रही। मंदिर प्रबंधन ने बताया कि रथ यात्रा को लेकर तैयारियां तेज़ी से चल रही हैं और आगामी धार्मिक आयोजन पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न कराए जाएंगे।