NEET UG 2026 Paper Leak: CBI का बड़ा दावा, लातूर कोचिंग संचालक ने ₹5 लाख देकर खरीदे केमिस्ट्री के सवाल, 111 प्रश्न मास्टर पेपर से मिले मैच

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NEET UG 2026 पेपर लीक मामले की जांच कर रही केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने स्पेशल कोर्ट में अहम खुलासा करते हुए दावा किया है कि महाराष्ट्र के लातूर स्थित एक कोचिंग सेंटर के संचालक शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के मास्टर प्रश्नपत्र से जुड़े केमिस्ट्री के प्रश्न हासिल करने के लिए ₹5 लाख का भुगतान किया था। जांच एजेंसी के अनुसार यह जानकारी अब तक की जांच में सामने आए सबसे महत्वपूर्ण तथ्यों में से एक है।

CBI ने अदालत में दाखिल अपने जवाब में बताया कि जांच के दौरान मोटेगांवकर का मोबाइल फोन बरामद किया गया। फोन की जांच में रसायन विज्ञान (Chemistry) के कुल 132 हस्तलिखित प्रश्नों की 36 तस्वीरें मिलीं, जिनमें कुछ डुप्लिकेट इमेज भी शामिल थीं। इन हस्तलिखित प्रश्नों का मिलान NTA के NEET UG 2026 मास्टर प्रश्नपत्र से किया गया, जिसमें 111 प्रश्न पूरी तरह मेल खाते पाए गए।

जांच एजेंसी के मुताबिक, मोबाइल में मौजूद ये नोट्स हाथ से लिखे गए थे और इन्हें कथित तौर पर केमिस्ट्री से जुड़े उपलब्ध कराए गए प्रश्नों के आधार पर तैयार किया गया था। CBI का कहना है कि बरामद सामग्री और अन्य डिजिटल साक्ष्य इस मामले की जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

CBI ने यह भी बताया कि मामले की जांच लगातार जारी है और अब तक इस केस में 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। दूसरी ओर, बिहार पुलिस ने अपनी अलग जांच के दौरान इस प्रकरण में 30 लोगों को गिरफ्तार किया था। दोनों एजेंसियां अपने-अपने स्तर पर पेपर लीक नेटवर्क की कड़ियों की जांच कर रही हैं।

गौरतलब है कि NEET UG 2026 परीक्षा 3 मई को देशभर के 551 शहरों तथा विदेश के 14 परीक्षा केंद्रों पर आयोजित की गई थी, जिसमें लगभग 23 लाख अभ्यर्थियों ने भाग लिया। परीक्षा के बाद गड़बड़ी की शिकायतें सामने आने पर NTA को मामले की जानकारी मिली। इसके बाद जांच शुरू हुई और बढ़ते विवाद के बीच 12 मई को परीक्षा रद्द कर दोबारा परीक्षा कराने का फैसला लिया गया।

CBI फिलहाल यह पता लगाने में जुटी है कि कथित पेपर लीक नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे, प्रश्नपत्र किस माध्यम से आरोपियों तक पहुंचा और इस पूरे नेटवर्क में अलग-अलग व्यक्तियों की क्या भूमिका रही। एजेंसी डिजिटल रिकॉर्ड, मोबाइल डेटा और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर मामले की गहन जांच कर रही है।