खड़गे का सरकार पर बड़ा आरोप: खाली सरकारी पदों और कॉन्ट्रैक्ट भर्ती से आरक्षण के अवसर घटने का दावा

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कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार की रोजगार और आरक्षण नीति को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी पदों को लंबे समय तक खाली रखने और स्थायी नौकरियों की जगह कॉन्ट्रैक्ट भर्ती बढ़ाने से आरक्षित वर्गों के रोजगार के अवसर प्रभावित हो रहे हैं।

खड़गे ने कहा कि मामला केवल सरकारी नौकरियों की संख्या का नहीं है, बल्कि सामाजिक न्याय से भी जुड़ा हुआ है। उनके मुताबिक, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को मिलने वाले आरक्षण का वास्तविक लाभ तभी मिल सकता है, जब सरकारी पदों पर नियमित भर्ती की जाए।

कांग्रेस अध्यक्ष के अनुसार, केंद्र सरकार में खाली पदों की संख्या पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ी है। उन्होंने दावा किया कि 2015 में केंद्र सरकार के करीब 4.21 लाख पद खाली थे, जबकि 2024 तक यह संख्या बढ़कर लगभग 8.24 लाख हो गई।

खड़गे ने अलग-अलग विभागों में बड़ी संख्या में पद खाली होने का भी दावा किया। उनके मुताबिक, रेलवे में करीब 2.40 लाख, रक्षा विभाग में 2.41 लाख और गृह मंत्रालय में लगभग 1.10 लाख पद रिक्त हैं।

उन्होंने कहा कि अगर सरकारी पद लंबे समय तक खाली रहेंगे तो उन पदों पर मिलने वाले आरक्षण का लाभ भी संबंधित वर्गों तक नहीं पहुंच पाएगा। इसी आधार पर उन्होंने सरकार की भर्ती व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए।

खड़गे ने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में स्थायी रोजगार घटने का भी दावा किया। उन्होंने कहा कि स्थायी नौकरियों की संख्या कम होने के साथ कॉन्ट्रैक्ट पर कर्मचारियों की नियुक्ति का चलन बढ़ा है, जिससे नियमित रोजगार के अवसर प्रभावित हो सकते हैं।

उनके मुताबिक, सार्वजनिक क्षेत्र में कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कर्मचारियों की हिस्सेदारी पहले लगभग 19 प्रतिशत थी, जो बढ़कर करीब 49 प्रतिशत हो गई है। खड़गे ने इसे रोजगार की प्रकृति में बड़ा बदलाव बताते हुए सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए।

खड़गे ने कहा कि आरक्षण को केवल संविधान में मौजूद प्रावधानों से नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, यदि आरक्षण वाले सरकारी पदों पर नियमित भर्ती ही नहीं होगी, तो आरक्षण का व्यावहारिक लाभ सीमित हो जाएगा।

उन्होंने आरोप लगाया कि स्थायी सरकारी नौकरियों को कम करना और कॉन्ट्रैक्ट आधारित रोजगार को बढ़ावा देना सामाजिक न्याय की व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि इससे उन वर्गों के युवाओं के अवसर प्रभावित हो सकते हैं, जिन्हें संविधान के तहत आरक्षण का अधिकार मिला है।

कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने बयान में डॉ. भीमराव आंबेडकर से जुड़े संवैधानिक अधिकारों का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियां आरक्षण व्यवस्था को कमजोर करने की दिशा में जा रही हैं। हालांकि, ये सभी दावे और आरोप खड़गे की ओर से लगाए गए हैं और इन्हें उनके राजनीतिक बयान के रूप में देखा जाना चाहिए।

खड़गे ने कहा कि सरकारी भर्तियों में खाली पदों को भरना और स्थायी रोजगार के अवसर बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने इसे रोजगार के साथ-साथ सामाजिक न्याय का मुद्दा बताते हुए सरकार की भर्ती नीति पर पुनर्विचार की मांग की।